महात्मा गांधी के 71वें बलिदान दिवस पर हिंदू महासभा ने फिर चलाई राष्ट्रपिता पर गोलियां

गांधी की पुण्यतिथि पर जहां दुनियाभर में उनकी प्रतिमाओं पर लोग फूल माला चढ़ा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं. गांधी के आदर्शों को जीवन में अपनाने की कसमें खा रहे हैं. वहीं भारत में ही कुछ ऐसे लोग हैं जो उस दिव्य आत्मा की पुण्यतिथि पर उनके पुतले फूंक रहे हैं, गोलियां बरसा रहे हैं. या ये कहा जाए कि गांधी के 71वें बलिदान दिवस पर उन्हें एक बार फिर मारने का प्रयास कर रहे हैं. दरअसल सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें हिंदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव पूजा पांडे नजर आ रही हैं. साध्वी की वेश-भूषा धारण किए इस कथित साध्वी के हाथ में ना ही कोई धार्मिक पुस्तक है और ना ही कोई कमंडल. इसके उलट इनके हाथ में एक पिस्तौल देखी जा सकती है, जिससे वह महात्मा गांधी की तस्वीर लगे पोस्टर पर गोलियां दाग रही हैं. गांधी गोलियों से मरने वाले नहीं हैं वीडियो में जीव हत्या को सबसे बड़ा अपराध मानने वाले धर्म का चोला पहन पूजा पांडे एक हत्यारे को महात्मा मानते हुए नारेबाजी कर रही हैं. उनके आस-पास चंद लोग भी खड़े हैं. जो कि नैतिक रूप से हरगिज हिंदू नहीं हो सकते, वो भी हत्यारे का महिमामंडन करते हुए गांधी जैसी दिव्य आत्मा का अपमान कर रहे हैं. उनको पुतले को दहन कर रहे हैं. साथ ही ये लोग गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को महात्मा बता रहे हैं. नाथूराम गोडसे भी इसी हिंदू महासभा से ताल्लुक रखता था. आज वो फिर चोला बदल के इन लोगों के वेश में दिखा. लेकिन गांधी को 71 साल पहले गोली मारने वाले ये लोग सात दशकों बाद भी ये नहीं समझे कि गांधी गोलियों से कभी मर ही नहीं  सकते. वो तो एक विचार है जो अन्याय के खिलाफ शांति प्रिय तरीके से संघर्ष करने वाले हर व्यक्ति और जीव में दिख जाएंगे. पब्लिसिटी के भूखे इन लोगों को इग्नोर नहीं किया जा सकता ये लोग सिर्फ पब्लिसिटी के भूखे हैं. इन लोगों में न सात दशक पहले ये हिम्मत थी के कुछ कर के लोगों के जेहन में बस सकें और न ही वो हिम्मत इनमें आज है. इसी लिए ये चंद सुर्खियां बटोरने के लिए ऐसी अभद्र कोशिशें कर रहे हैं. याद रहे कि गांधी सांप्रदायिक सद्भाव की रक्षा करते हुए शहीद हुए थे. और वह इसमें सफल भी रहे. जबकि उनकी हत्या करने वाले आज भी संप्रदायों के बीच जहर घोलने की कोशिश करते रहते हैं और हर बार विफल होते हैं. हालांकि ऐसी हरकत करने के बाद इन लोगों को इग्नोर हरगिज नहीं किया जाना चाहिए. इग्नोर कर के इन्हें धीरे-धीरे बढ़ावा दिए जाने से देश के उन क्रांतिकारियों का लगातार अपमान होता रहेगा जिन्होंने अपने स्वर्णिम भविष्य को त्याग कर देश के हित के लिए बलिदान का रास्ता चुना. आजादी के नेतृत्वकर्ता का ऐसा अपमान हरगिज नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

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