राजनीतिक उद्देश्यों के लिए जजों पर हमला नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस विनीत सरन के साथ एक पीठ की ओर से एक मामले पर फैसला सुनाते हुए, जस्टिस मिश्रा ने वकीलों के एक समूह को जमकर फटकार लगाई है. उन्होंने कहा कि वे (वकीलों का समूह) सस्ते प्रचार के भूखे हैं और सोचते हैं कि वे बार काउंसिल से भी ऊपर हैं. उन्होंने कहा, 'यह समय-समय पर देखा गया है कि न्यायिक प्रणाली पर कई हमले किए गए हैं. यह आम हो गया है कि बार के सदस्य मीडिया या प्रेस के सामने जा कर जजों की आलोचना और अवमानना करते हैं. जजों को कुछ निर्णयों के लिए राजनीतिक उद्देश्य पूरे करने का जिम्मेदार ठहराया जाता है. यह कोर्टी की अवमानना का उग्र रूप है. न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के जज ने वकीलों को मीडिया और प्रेस की बहसों के दौरान जजों पर हमला किए जाने को लेकर फटकार लगाई है. उनका कहना है कि कोर्ट के फैसलों को राजनीतिक रंग देना कोर्ट की अवमानना का उग्र रूप है. राजनीतिक उद्देश्यों के लिए जजों और न्यायपालिका पर आरोप नहीं लगाया जा सकता है. जस्टिस मिश्रा का कहना है कि अगर कोर्ट का निर्णय किसी के प्रतिकूल नहीं आता है तो वह जज के खिलाफ किसी उचित मंच पर शिकायत दर्ज करा सकता है. लेकिन प्रेस में उनपर हमला करना बिलकुल भी उचित नहीं है. कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि वकीलों को प्रेस में बहस के माध्यम से निर्णयों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

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