स्वाइन फ्लू का कहर: एक महीने में 169 लोग गवां चुके हैं जान

स्वाइन फ्लू ने एक बार फिर देशभर में कोहराम मचाना शुरू कर दिया है. नए साल की शुरुआत से ही देशभर से स्वाइन फ्लू के कई मामले सामने आए हैं. न्यूज 18 के मुताबिक अब तक करीब 4 हजार 571 लोग स्वाइन फ्लू से पीड़ित पाए गए हैं. यानी पिछले एक महीने में देशभर से हर रोज स्वाइन फ्लू के 168 मामले सामने आए हैं. वहीं स्वाइन फ्लू के चलते अब तक करीब 169 लोग अपनी जान गवां चुके हैं. NCDC की रिपोर्ट के मुताबिक स्वाइन फ्लू का सबसे ज्यादा खतरा राज्सथान में हैं. यहां से स्वाइन फ्लूव के करीब 1,856 (40 फीसदी) मामले सामने आए हैं. वहीं इस बीमारी से राज्य में अब तक 72 लोगों की जान जा चुकी है. राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा, सरकार ने पांच नए मेडिकल कॉलेजों में स्वाइन फ्लू के टेस्ट की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है. दिल्ली से भी सामने आ चुके हैं कई मामले इसके अलावा एक महीने में दिल्ली में भी स्वाइन फ्लू के 479 मामले सामने आ चुके हैं. स्वाइन फ्लू के सबसे ज्यादा मामले में 2015 में सामने आए थे, जिसमें करीब 42,592 लोग इस बीमारी से पीड़ित पाए गए थे. इसके अलावा पिछले साल 14,992 लोग पिछले सा स्वाइन फ्लू से पीड़ित पाए गए थे और करीब 1,103 लोगों की इस बीमारी के चलते मौत हो गई थी. कैसे फैलता है स्वाइन फ्लू? दरअसल ये एक संक्रमण है, जो इंफ्लूएंजा ए वायरस के कारण फैलता है. ये वायरस सुअरों में पाया जाता है. इंसानों में ये संक्रामक बीमारी काफी तेजी से फैलती है. अगर सावधानी न बरती जाए, तो ये काफी गंभीर भी हो सकती है. स्वाइन फ्लू का खतरा अधिकतर ठंड और बरसात में रहता है क्योंकि ये बीमारी नमी के चलते तेजी से फैलती है. स्वाइन के साथ सबसे बड़ी समस्या ये है कि इसके लक्षण पहली नजर में सामान्य सर्दी-जुकाम लगने जैसे होते हैं. इसमें तेज बुखार, जुकाम, छींक जैसी स्थिति होती है. लेकिन परेशानी ज्यादा बढ़ने पर उल्टी-दस्त भी लग सकते हैं. साथ ही मरीज के मांसपेशियों में दर्द, जकड़न, सिर और गले में दर्द की शिकायत रहती है. भूख नहीं लगती और अनिद्रा की समस्या पैदा हो जाती है. स्वाइन फ्लू की समस्या लगने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं. हालांकि, अभी तक स्वाइन की वैक्सीन नहीं बनी है, लेकिन इसमें एंटीवायरल दवाइयां काफी मदद करती हैं. इसमें लक्षण दिखाई देने के दो दिनों के भीतर एंटीवायरल दवाइयां ले लेनी चाहिए. इसका अच्छा उपचार डॉक्टर के दिशा-निर्देश में इलाज करवाना ही है.

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